जाने साइकिल का आविष्कार किसने किया | Cycle Ka Aavishkar Kisne Kiya

 जाने साइकिल का आविष्कार किसने किया और कब? | Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya

इस पोस्ट मे हम आपको यह बताएंगे की साइकिल का आविष्कार किसने किया और कब था। अगर आप भी यह नहीं जानते की आप जो साइकिल चलते थे अपने बचपन मे यह फिर आप आज भी साइकिल चलते है। अपने अच्छे स्वस्थ के लिए तो आपको यह जरूर जानना चहाइए की जो साइकिल आप चला रहे वो सबसे पहले Cycle Ka Aavishkar Kisne Kiya और किस सन् मे बनाई अगर आपको लगता है की यह साइकिल सबसे पहले भारत देश मे बनी है तो आप हमको कमेन्ट करके बता सकते है।

दोस्तों कई बार जब आप भी साइकिल देखते होंगे तो आपके मन मे भी यह सवाल आता होगा की इस साइकिल का अविस्कार आखिर कैसे हुआ किस विज्ञानिक ने इसकी सबसे पहले संरचना की था। इस लिए आज हम आपको साइकिल से जुड़े सभी इतिहास इस पोस्ट मे बताएंगे लेकिन उससे पहले बता दे की एक टाइम मे विश्व मे साइकिल का ही प्रचलन था जैसे आप लोग कर और बाइक के साउख रखते है वैसे पहले के समय मे लोग साइकिल का साउख रहते थे क्योंकि इससे ना तो किसी प्रकार का प्रदूषण होता और ना ही कोई पेट्रोल व डीजल भरवाना पढ़ता था। लेकिन जैसे – जैसे समय बदल वैसे – वैसे लोगों के साउख भी बदलेने लगे और साइकिल का भी साउख लोगों के अंदर से चला गया। लेकिन कोई यह नहीं समझता की जितना स्वस्थ आप साइकिल चला कर रह सकते हो उतना बाइक व कर को नहीं।

साइकिल का आविष्कार किसने किया था | Cycle Ka Aavishkar Kisne Kiya

Cycle Ka Aavishkar Kisne Kiya – दुनिया की पहली साइकिल की आविष्कार करने वाले व्यक्ति का नाम Karl Von Drais था जोकी जर्मनी के निवासी थे। Karl Von Drais ने दुनिया की इस पहली साइकिल का आविष्कार आज के लगभग 200 वर्ष पहले सन् 1817 मे किया था। इसी के साथ आपको बता दे की इन्हों केवल साइकिल ही नहीं बल्कि सन् 1812 मे कागज पर पियानो से संगीत रिकॉर्ड करने वाला उपकरण, सन् 1817 मे साइकिल, 1821 मे कीबोर्ड वाला टाइप राइडर और सन् 1827 मे 16 अक्षर वाला स्तनोग्राफी मशीन की अविस्कार किया। आपको बता दे की Karl Von Drais एक जाने माने आविष्कारक थे जो आपके समय मे अपने आविष्कारों के लिए बहुत प्रसिद्ध थे।

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साइकिल का आविष्कार कैसे और कब हुआ

दोस्तों बात दर्शल सन् 1815 की है जब इंडोनेशिया मे माउंट तम्बोरा पर स्थित ज्वालामुखी अचानक से फट गया एर फिर इस ज्वालामुखी से निकलने वाला सर कला धुआ पूरे विश्व मे फैलने लगा। जिसके कारण दुनिया भर के देशों का तापमान अचानक से कम होने लगा और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तरी गोलार्ध मे देखने को मिल था। क्योंकि वहाँ की सारी फासले बर्बाद हो गई थी।

फसल के बर्बाद होने की वजह से उन सभी देशों मे भुखमरी जैसे हालत हो गए थे और इसी के साथ सभी पालतू जानवरों की मृत्यु होने लागि थी। पहले के समय मे जब साइकिल का आविष्कार नहीं हुआ था तब पालतू जानवर के सहारे हो लोग एक जगह से दूसरी जगह की दूरी तय करते थे। लेकिन पालतू जानवरों की मृत्यु के बाद यह मुमकिन नहीं था। इसी के बाद Karl Von Drais ने इस समस्या को देखते हुए साइकिल का आविष्कार किया था।

Cycle Ka Aavishkar Kisne Kiya

आपको बता दे की सुरुवात मे साइकिल केवल लड़कियों के लिए ही बनाई गई थी जिसमे ना कोई पैंडाल था और न ही कोई गेयर केवल बैठने के लिए एक सीट और साइकिल को संभाले के लिए एक हेंडल अगर साइकिल का मार्ग पर घूमना हो तो आप हैन्डल का प्रयोग करे बाकी आप साइकिल का धक्का मार के चलाइए।

Karl Von Drais द्वारा बनाई गई इस साइकिल का वजन 23 किलोग्राम था। जिसे Karl Von Drais ने 12 जून 1817 को जर्मनी के पेश किया था। इसी के बाद इसकी टेस्ट के लिए इसको दो शहर मैनहेम और रिनाऊ तक चला कर देखा गया इन दो शहर के बैच की दूरी 7 किलोमीटर थी जिसे 1 घंटे के समय अवधि मे पूरा किया गया था।

पैंडाल वाली साइकिल कब आई

दोस्तों आपको यह तो पता चाल गया की Cycle Ka Aavishkar Kisne Kiya लेकिन जैसे की आपको पता चाल गया की पहले जो साइकिल का आविष्कार हुआ उसमे पैंडाल नहीं थी और इस साइकिल को केवल लड़की के लिए बनाया गया था। लेकिन सन् 1863 मे फ़्रांस के एक मैकनिक ने इस साइकिल का सही करके इसमे पैंडाल जोड़े जिसके बाद यह साइकिल पैंडाल वाली साइकिल बन गई थी। जिसे कोई भी बैठ कर पैंडाल मार के चल सकता था लकें यह पैंडाल आज की साइकिल की तरह बीच मे नहीं बल्कि अगले पहिये मे लागि हुई थी।

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इसी के बाद हर देश मे साइकिल को ठीक और सही किया लेकिन सन् 1885 मे जान केंप ने आज की तह दिखने वाली साइकिल का निर्माण किया था। जिसे लोगों ने अपने इस्तेमाल के लिए खरीद और चलना सुरू भी किया।

भारत मे साइकिल सबसे पहले अंग्रेज लाए थे अपने साशन कल मे जिसके बाद भारत मे भी साइकिल का निर्माण सुरू हुआ और सबसे पहले साइकिल का निर्माण करने वाली कंपनी Hind Cycle थी जिसे मुंबई मे स्थापित किया गया था और वही से साइकिल का सफल भारत मे भी सुरू हुआ।  

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